
संस्कृत व्याकरण (Sanskrit Vyakaran)
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संस्कृत व्याकरण (Sanskrit Vyakaran)
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Motilal Banarasidas Publishing House
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विश्व की सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है। परमात्मा ने देवताओं और ऋषियों के माध्यम से इसे पृथ्वी पर अभिव्यक्त किया है। विश्व-वाङ्मय के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं और इन वेदों की रचना संस्कृत भाषा में है। भारतीय ज्ञान, दर्शन, धर्म, संस्कृति-आदि का आधार संस्कृत भाषा है और भाषा के ज्ञान व अध्ययन के लिये व्याकरण का ज्ञान परम आवश्यक है। यद्यपि संस्कृत-व्याकरण के अनेक ग्रन्थ हैं और अनेक व्याकरण आचार्य हुये हैं। सामान्यतः सभी के लिए व्याकरण-ग्रन्थों का अध्ययन सम्भव नहीं है। इस पुस्तक में संस्कृत व्याकरण की मूलभूत बातों को जानने की इच्छा रखने वाले शिक्षार्थियों के लिये संस्कृत-व्याकरण को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी अभिरुचि में वृद्धि हो तथा संस्कृत-साहित्य के प्रति जिज्ञासा में वृद्धि हो। यह पुस्तक निश्चित रूप से छात्रों के लिए लाभ-प्रद होगी।
Book Details:
Author: Dr. Beena Gupta
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2025
Pages: 805
Language: Hindi & Sanskrit
Size: 6" x 9"

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विश्व की सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है। परमात्मा ने देवताओं और ऋषियों के माध्यम से इसे पृथ्वी पर अभिव्यक्त किया है। विश्व-वाङ्मय के प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं और इन वेदों की रचना संस्कृत भाषा में है। भारतीय ज्ञान, दर्शन, धर्म, संस्कृति-आदि का आधार संस्कृत भाषा है और भाषा के ज्ञान व अध्ययन के लिये व्याकरण का ज्ञान परम आवश्यक है। यद्यपि संस्कृत-व्याकरण के अनेक ग्रन्थ हैं और अनेक व्याकरण आचार्य हुये हैं। सामान्यतः सभी के लिए व्याकरण-ग्रन्थों का अध्ययन सम्भव नहीं है। इस पुस्तक में संस्कृत व्याकरण की मूलभूत बातों को जानने की इच्छा रखने वाले शिक्षार्थियों के लिये संस्कृत-व्याकरण को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जिससे उनकी अभिरुचि में वृद्धि हो तथा संस्कृत-साहित्य के प्रति जिज्ञासा में वृद्धि हो। यह पुस्तक निश्चित रूप से छात्रों के लिए लाभ-प्रद होगी।
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